बेचारे वर्माजी - हास्यकथा
(गीतों भरी कहानी)
वर्मा जी भाभीजी और साली को लेकर कार से कहीं जाने वाले थे। कार में गाने सुनने के लिए मुझसे से "पैन ड्राइव" ले गए
पैन ड्राइव में मैंने कल ही "सुख-दुःख" टाइटल वाले कुछ गाने भर के रखे थे
कार वर्मा जी चला रहै थे.....
भाभीजी पीछे बैठी,साली अगली सीट पर बैठी...
म्यूज़िक चालू किया,पहला गाना बजा
आगे सुख तो पीछे दुख है...
भाभी जी गुस्सा हो गई....
"गाड़ी रोको" और कार से उतर गई,साली साहिबा भी उतर गई...
जैसे तैसे समझाया....
भाभीजी अगली सीट पर बैठी साली पीछे की सीट पर बैठ गई......
कार चली....
तब तक गाना चेंज हो गया.....
आना जाना लगा रहेगा, दुःख आएगा, सुख जाएगा...
भाभी जी फुल गुस्सा !
गाड़ी रूकवाई.....!
और गुस्से में खुद भी साली के साथ पिछली सीट पर बैठ गई....
कार फिर चली.......अगला गाना बजा
सुख दुख दोनों रहते जिसमें जीवन है वो गांव, कभी धूप तो कभी छांव...
भाभीजी अब गुस्से में वर्माजी को भला बुरा सुनाने लगी......
जान बूझ कर ऐसे गाने बजा रहे हो, मुझे चिढ़ाने के लिए?
गुस्से में साली को फिर अगली सीट पर भेज दिया....
आगे बढ़े......
अगला गाना आया
राही मनवा दुख की चिंता क्यों सताती है दुख तो अपना साथी है, सुख है एक छांव ढलती, आती है जाती है....
अब तो भाभी जी बिफर गई .....
चौक पर बड़बड़ाते हुए कार से उतर कर एक रोड पर मुड़ गई......
माहौल बिगड़ता देख साली भी कार से उतर कर दूसरी रोड पर पैदल चली गईं
ड्राइविंग सीट पर बैठे वर्माजी ने सोचा...
पत्नी को मनाने इधर जाऊं या साली को मनाने उधर जाऊं ?
तब तक अगला गाना शुरू हो गया
संसार है एक नदिया, सुख दुख दो किनारे हैं, ना जाने कहाँ जायें हम बहते धारे हैं...
प्रस्तुति
रवि के गुरुबक्षणी
स्ट्रीट 5 गुरुबक्षणी निवास धर्मशाला के सामने रविग्राम तेलीबांधा रायपुर छग 492006

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