ये बात कई लोग आपसे कहेंगे कि समय से पहले और किस्मत से ज़्यादा किसी को कुछ नहीं मिलता। पर कोई भी ये नहीं बताएगा कि समय कब है और किस्मत में क्या है।
ये बात असल में सिर्फ धैर्य धारण करने सब्र रखने के लिए प्रेरित करती है वो भी तब जब आप पूरी तरह से प्रयास करके थक गए हों, हार मान चुके हों।
कोई मुकेश अम्बानी, जेफ बेजोस, एलन मस्क को जाकर नहीं कहेगा कि भैया शांत हो जा, किस्मत से ज़्यादा और समय से पहले किसी को कुछ नहीं मिलता।
भाग्यवादियों की ढाल है ये कथन और अक्सर कुछ हासिल नहीं होने पर ही कहा जाता है। समय और परिस्थितियों की अपनी महत्ता होती है इससे कोई इनकार नहीं है लेकिन इसे शुरू से ही अपने दिल दिमाग पर हावी रखना ठीक नहीं।
कुछ अकर्मण्य लोग इसे अपने बचाव का जुमला बना लेते हैं, अपने प्रयासों की कमी छुपाने, अपनी असफलता की ज़िम्मेदारी लेने से बचने के लिए लोग अक्सर यही कहते फिरते हैं, कि हमने कोशिशें तो बहुत की पर किसी को भी समय से पहले और नसीब से ज़्यादा कुछ नहीं मिलता।
ये बात हमेशा याद रखने वाली है कि 'समय' जीवन के आखरी क्षण तक है, और संभावनाएं भी अंतिम क्षण तक बनी रहेंगी।
@मन्यु आत्रेय

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