रीतिरिवाजों की परवाह से परे
बढ़ते कदम का मिला सहयोग
आज की तारीख सुनहरे अक्षरों में लिखा जायेगा। छत्तीसगढ़ की लाडली बेटी ने आज वो कर दिखाया जो बड़े बड़े सूरमा नहीं कर पाए थे। आज फिर नए ज़माने ने करवट बदली है। नयी सोच का आगाज हुआ है। परंपरागत रुदिवादीदकियानूसी नियमो से परे एक लड़की ने शमशान जैसी जगह पर कदम रखकर अपने पिता के अंतिम संस्कार को पूरा किया है। नारी शक्ति की नई मिसाल बनकर उभरी अजमेर ने अपने जीवन में कई कष्ट देखे है। पूरी जिंदगी वह मुफलिसी से जीती रही है। अपनों ने मुह मोड़ लिया गैरों से क्या उम्मीद करे? ऐसे प्रयास पूरे करने के लिए कलेजा चाहिए जो हर किसी के पास नहीं होता है। बेबी उसके घर कण नाम है। लेकिन अब वो बड़ी हो गई। इतनी बड़ी की समाज के पुराने घिसे पिटे नियमो को बदलने का साहस कर बैठी है। जैसे ही हमें पता चला ऐसी साहसी लड़की का मनिबल बदने और दुःख में सहभागी बन्ने के लिए हम दोस्तों की टीम शमशान घाट से लेकर घर तक अजमेर के दुःख में सहभागी बने। जिसके मन में जैसा आया वैसी मदद करने लगा। बढ़ते कदम सामाजिक संस्था के बैनर तले यह पुनीत कार्य संपन किया गया।
महावीर नगर सहयोग पार्क में रहने वाले प्रेम अग्रवाल का कल २३ फरवरी को 70 वर्ष की आयु में निधन हो गया था. परिवार की इकलौती लड़की अजमेरा ने अपने पिता के अंतिम-संस्कार को स्वयं पूरा करने का बीड़ा उठाया. समाज में व्याप्त तमाम कुरीतियों की परवाह न करते हुए 24 वर्षीय अजमेरा ने बढ़ते कदम के सहयोग से यह कार्य पूरा किया. उसनें जिस दृढ़ता और साहस से अपने आप पर संयम रखा वह अनुकरणनीय कहा जाएगा. समाज सेवी संस्था बढ़ते कदम ने अजमेरा जैसी साहसिक नारियों का कंधे से कंधा मिलाने का संकल्प लिया है. प्रेम अग्रवाल काफी समय से बीमार चल रहे थे. उनकी दोनों किडनियां फेल हो चुकी थीं. उनका कोई पुत्र नहीं है. इस दाह-संस्कार के कार्यक्रम में अमर गुरुबक्षाणी, सेवक कुकरेजा, प्रहलाद खेमानी, सुनील छतवानी, रवि के गुरुबक्षानी , अशोक गुर्बक्षानी सहित समाज के अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे. सिंधी समाज ने अग्रवाल परिवार के लिए अनाज व दाल आदि की व्यवस्था की है. अजमेरा के लिए यह दुखों का अवसर है. कुछ समय पहले ही उनका अपने पति से तलाक हुआ है. वह अभी इस सदमें से उभर ही नहीं पाई थीं कि प्रकृति ने उसके साथ यह क्रूर मजाक किया है. अब वह नितांत अकेलापन महसूस कर रहीं है. ऊपर वाले की महिमा अपरंपार है. दरअसल वो मानव की परिक्षा लेता है. अजमेरा जिस साहस से इस दुख की घड़ी में अडिग खड़ी है, वह तारिफेकाबिल है. प्रेम के 4 भाई भी है.पर अफसोस कि उनमें से कोई भी इस दुख की घड़ी में शामिल तक होने नहीं आया. इंसानियत का कोई महत्व नहीं रह गया , लगता है. शाबाश अजमेरा......

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